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Bihari Ratnakar बिहारी रत्नाकर के दोहे (7-12) व्याख्या सहित


Bihari Ratnakar Ke Dohe Vyakhya Sahit by Jagannath Das Ratnakar in Hindi : नमस्कार दोस्तों ! जैसाकि हमने पिछले अध्याय से श्री जगन्नाथदास रत्नाकर रचित “बिहारी-रत्नाकर” के दोहों की व्याख्या शुरू कर दी है। इसी कड़ी में आज हम इसके अगले 7 से लेकर 12 तक के दोहों का विस्तृत अध्ययन करने वाले है। तो चलिए विस्तार से समझते है :

श्री जगन्नाथदास रत्नाकर रचित “बिहारी-रत्नाकर” के दोहों का विस्तृत अध्ययन करने के लिये आप
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Bihari Ratnakar बिहारी रत्नाकर के दोहों (7-9) की विस्तृत व्याख्या


Jagannath Das Ratnakar Krit Bihari Ratnakar Ke Dohe 7-9 Vyakhya in Hindi : दोस्तों ! बिहारी रत्नाकर के 7-9 दोहों की व्याख्या इसप्रकार है :

दोहा : 7.

जुबति जोन्ह मैं मिलि गई, नैक न होति लखाइ।
सौंधे कै डोरै लगी अली चली संग जाइ।।7.।।

व्याख्या :

दोस्तों ! इस दोहे में कवि ने शुक्लाभिसारिका नायिका का चित्रण किया है। शुक्लाभिसारिका नायिका अर्थात् जो नायिका रात्रि के समय अपने प्रियतम से मिलने जाती है। नायिका अपनी सखी के साथ अपने प्रियतम से मिलने के लिये जाती है।

कवि उस रात्रिकालीन स्थिति का वर्णन करते हुये कहते हैं कि आसमान से चांदनी की वर्षा हो रही है और नायिका का रंग भी चांदनी की तरह उज्जवल और गोरा है। ऐसे में कहीं पता ही नहीं चल रहा कि नायिका कहाँ चल रही है।

ऐसी स्थिति में उसकी सखी भी विस्मय में पड़ गई है कि वह नायिका कहाँ है। वह केवल नायिका के शरीर के गंध के सहारे ही आगे बढ़ती जा रही है। दोस्तों ! इसमें अतिश्योक्ति एवं छेकानुप्रास अलंकार प्रयुक्त हुआ है।

दोहा : 8.

हौं रीझी लखि रीझिहौ छबिहि छबीले लाल।
सोनजुही सी होति दुति-मिलत-मालती माल।।8.।।

व्याख्या :

दोस्तों ! इस दोहे में दूती नायक के सामने नायिका के सौंदर्य का वर्णन कर रही है। हे नायक अर्थात् छबीले नायक ! वह नायिका अति सुंदर है। आप तो रसिक भाव या प्रेम भाव से परिपूर्ण हैं ही। मैं स्वयं स्त्री होकर भी उसके सौंदर्य पर मुग्ध हो गई हूँ। उसके आकर्षण में बंध गई हूँ।

हे छबीले लाल ! हे रसिक युवक ! आप भी जब उसे देखेंगे तो आप भी उस पर आसक्त हो जायेंगे, क्योंकि उसका सौंदर्य, उसका रंग सुनहरा है। उसके सुनहरे रंग के प्रतिबिंब के कारण, सफेद रंग के मालती के फूलों की माला भी स्वर्ण जूही के फूलों के समान प्रतीत होती है।

अर्थात् नायिका का वर्ण इतना लावण्य और चंपक पुष्प के समान सुनहरा है कि उसके गले में पड़ी हुई मालती पुष्पों की सफेद माला, सोनजूही के फूलों वाली पीतवर्ण माला लगने लगती है। इस दोहे में छेकानुप्रास, वृत्यानुप्रास एवं उपमा अलंकारों का प्रयोग किया गया है।

दोहा : 9.

बहके, सब जिय की कहत, ठौरू कुठारू लखेन।
छिन औरे, छिन और से, ए छबि छाके नैन।।9.।।

व्याख्या :

दोस्तों ! इस दोहे में पूर्वानुरागिनी नायिका का चित्रण किया गया है। पूर्वानुरागिनी नायिक अर्थात् जो नायिका पहले से ही नायक के प्रति अपने हृदय में प्रेम भाव रखती है। इस दोहे में नायिका की सखी नायिका के स्वभाव को देखकर, उसे प्रेम-भावना की असमय अभिव्यक्ति करने से रोकना चाहती है, किंतु नायिका प्रेम के वशीभूत होने के कारण विवश है।

अतः नायिका कहती है कि हे सखी ! नायक के सौंदर्य के नशे में डूबे हुये मेरे नेत्र बहक जाते हैं और ठौर-कुठौर अर्थात् उचित या अनुचित स्थान को न देखते हुये मेरे मन की सारी गुप्त बातें कह देते हैं।

हे सखी ! मेरे नेत्र इतने अनियंत्रित हो गये हैं कि मैं चाह कर भी इन्हें नियंत्रण में नहीं रख पा रही हूँ। ये नेत्र एक क्षण में कुछ होते हैं और दूसरे क्षण में कुछ और, ऐसी स्थिति में मेरे लिये इन पर नियंत्रण करना कठिन हो गया है। इस दोहे में वृत्यानुप्रास अलंकार का प्रयोग हुआ है।

Bihari Ratnakar बिहारी रत्नाकर के दोहों (10-12) की विस्तृत व्याख्या


Jagannath Das Ratnakar Krit Bihari Ratnakar Ke Dohe 10-12 Vyakhya in Hindi : दोस्तों ! बिहारी रत्नाकर के अगले 10-12 दोहों की व्याख्या इसप्रकार है :

दोहा : 10.

फिरि फिरि चितु उस ही रहतु टुटी लाज की लाज।
अंग-अंग-छबि-झौर मैं भयौ भौर की नाव।।10.।।

व्याख्या :

यहाँ इस दोहे में भी पूर्वानुरागिनी नायिका का चित्रण किया गया है। नायिका के मन में नायक के प्रति जो प्रेम भाव है, उसका चित्रण नायिका एक नाव के माध्यम से कर रही है। वह अपनी सखी से कहती है कि हे सखी ! मेरा मन नायक के प्रेम में इतना निमग्न हो गया है कि मैं जितनी बार अपने चित्त को उसकी ओर से हटाती हूँ, उतनी ही बार मेरा हृदय उसकी ओर चला जाता है।

ऐसा प्रतीत होता है कि मेरे चित्त की लज्जा रूपी डोरी टूट गई है। अब स्थिति यह हो गई है कि नायक के अंग-प्रत्यंग से उत्पन्न सौंदर्य के भंवर में मेरी मन रूपी नाव अटक कर रह गई है।

जिस प्रकार कोई नाव अपने बंधन अर्थात् डोरी के टूट जाने के बाद पानी के भँवर में गोलाकार घूमती रहती है, वैसे ही नायक की छवि के भँवर में मेरा चित्त घूम रहा है। ये वहाँ से दूर होता ही नहीं है। दोस्तों ! इस दोहे में पुनरुक्ति प्रकाश, छेकानुप्रास और रूपक अलंकार का प्रयोग हुआ है।

दोहा : 11.

नौकी दई अनाकनी, फीकी परी गुहारि।
तज्यौ मनौ तारन-बिरदु बारक बारनुतारि।।11.।।

व्याख्या :

दोस्तों ! इस दोहे में कवि अपनी भक्ति को श्रीकृष्ण जी के प्रति अभिव्यक्त कर रहे हैं। उनके और श्रीकृष्ण जी के बीच का संबंध इतना प्रगाढ़ है कि वे किसी भी प्रकार से असंतुष्ट होने पर उलाहना भी श्रीकृष्ण जी को ही देते हैं। आपको बता दे कि कवि बिहारी ने निम्बार्क संप्रदाय में दीक्षा ली थी और वे श्रीकृष्ण जी के भक्त थे।

इस दोहे में कवि श्रीकृष्ण जी को उलाहना देते हुये कह रहे हैं कि हे नाथ ! आज आपने तो मेरे प्रति पूर्ण उपेक्षा का भाव रखा है, क्योंकि अपने उद्धार के लिए मेरी प्रार्थना आपके कानों तक पहुंचती ही नहीं है। मेरी सारी प्रार्थना फीकी पड़ती जा रही है।

ऐसा लगता है कि आप एक बार हाथी का उद्धार करने में ही थक गये हैं। आपने अब उद्धारकर्ता की उपाधि को त्याग ही दिया है। दोस्तों ! यहां वृत्यानुप्रास एवं उत्प्रेक्षा अलंकार का प्रयोग हुआ है।

दोहा : 12.

चितई ललचैहें चखनु, डटि घूंघट-पट माँह।
छल सौं चली छुपाइ कै, छिनकु छबीली छांह।।12.।।

व्याख्या :

दोस्तों ! जब नायक अपने लिये नायिका की अनुरागोत्पादक चेष्टाओं को देखता है तो वह नायिका की सखी से कहता है कि नायिका ने अपने घूँघट में से लजाई हुई आंखों से अपलक दृष्टि से देखा और वह बड़ी चतुराई से अपनी छबीली छांह अर्थात् रूप-सौंदर्य का स्पर्श कराकर चली गई।

उस स्पर्श के आभास मात्र से प्राप्त परम सुख के कारण मेरा मन अब पूर्ण स्पर्श-सुख प्राप्त करने के लिये व्याकुल हो रहा है अर्थात् मेरे हृदय में अब नायिक को पूर्ण स्पर्श करने की भावना जागृत हो गई है। इस दोहे में वृत्यानुप्रास अलंकार प्रयुक्त हुआ है।

इसप्रकार दोस्तों ! आज हमने बिहारी रत्नाकर के अगले 7-12 तक के दोहों का विस्तृत अध्ययन किया। उम्मीद है कि आपको इन दोहों की व्याख्या अच्छे से समझ आ गयी होगी। फिर मिलते है अगले कुछ नए दोहों के साथ।


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एक गुजारिश :

दोस्तों ! आशा करते है कि आपको “Bihari Ratnakar बिहारी रत्नाकर के दोहे (7-12) व्याख्या सहित” के बारे में हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी I यदि आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके अवश्य बतायें I हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगे I

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