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Dusra Saptak Ke Kavi | दूसरा सप्तक के कवि एवं रचनाएँ


नमस्कार दोस्तों ! आज हम Dusra Saptak Ke Kavi | दूसरा सप्तक के कवियों और उनके प्रमुख रचना संग्रह के बारे में अध्ययन करने जा रहे है। पिछले नोट्स में हमने तार सप्तक के कवियों के बारे में जान लिया था। तो चलिए समझते है :



अज्ञेय के द्वारा संपादित दूसरा सप्तक का प्रकाशन 1951 में हुआ। इसमें सात कवियों को सम्मिलित किया गया है। दूसरा सप्तक की भूमिका में अज्ञेय ने नंददुलारे वाजपेई की अवधारणा का खंडन करते हुए कहा है, —

प्रयोग अपने आप में इष्ट नहीं है, बल्कि वह सत्य को जानने का दोहरा साधन है। क्योंकि एक तो वह उस सत्य को जानने का साधन है, जिसे कवि प्रेषित करता है; दूसरे वह इस प्रेषण क्रिया को और उसके साधनों को जानने का साधन है।”

दूसरा सप्तक में सम्मिलित कवि इस प्रकार हैं :

  1. भवानी प्रसाद मिश्र
  2. धर्मवीर भारती
  3. शमशेर बहादुर सिंह
  4. रघुवीर साही
  5. नरेश मेहता
  6. हरिनारायण व्यास
  7. शकुन्त माथुर


तार सप्तक के कवि प्रयोगवादी हैं, किंतु दूसरा सप्तक के कवि नयी कविता धारा से संबंध रखते हैं। दूसरे सप्तक में शमशेर बहादुर सिंह प्रयोगवादी कवि हैं एवं शेष सभी नयी कविता के कवि हैं।


प्रयोगवाद और नयी कविता में अंतर


  • प्रयोगवाद में व्यष्टि चेतना पर बल है जबकि नयी कविता में समष्टी चेतना पर बल है।
  • प्रयोगवादी कविता का भाव-बोध सीमित है जबकि नयी कविता का भाव-बोध व्यापक है।
  • इस प्रयोगवाद में प्रयोग की जिद है, जबकि नयी कविता में प्रयोग की जिद तो नहीं है लेकिन प्रयोग से परहेज भी नहीं है।
  • यद्यपि प्रयोगवाद में छायावादी काव्य भाषा का विरोध किया है तथापि इस पर छायावादी प्रभाव पड़ा है। लेकिन नयी कविता की भाषा का छायावादी काव्य भाषा से दूर-दूर तक संबंध नहीं है।
  • प्रयोगवादी व्यष्टि चेतना ने नयी कविता में लघुमानव की प्रतिष्ठा स्थापित कर दी।
  • प्रयोगवाद में जनजीवन नहीं है, लेकिन नयी कविता में जनजीवन है।
  • मुक्तिबोध नयी कविता को परिभाषित करते हैं, —

नयी कविता वैविध्यमयी जीवन के प्रति आत्मचेतस कवि की अभिव्यक्ति है।”



Dusra Saptak Ke Kavi | दूसरा सप्तक के कवि एवं रचना संग्रह


Bhawani Prasad Mishra | भवानी प्रसाद मिश्र

भवानी प्रसाद मिश्र हिंदी के प्रसिद्ध कवि और दूसरे तार सप्तक के प्रमुख कवि हैं। इनका जन्म 29 मार्च, 1914 को मध्यप्रदेश में हुआ। ये गांधीवादी विचारक थे। गांधीवादी दर्शन का प्रभाव उनकी कविताओं में हमें देखने को मिलता है। इनका प्रथम संग्रह “गीत फरोश” अत्यंत लोकप्रिय है।

काव्य संग्रह :

  1. अनाम तुम आते हो
  2. त्रिकाल संध्या
  3. परिवर्तन जिए
  4. मानसरोवर दिन
  5. बुनी हुई रस्सी
  6. खुशबू के शिलालेख
  • भवानी प्रसाद मिश्र को उनकी रचना “बुनी हुई रस्सी” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है।

प्रबंध रचना :

  1. कालजयी

चर्चित कविताएँ :

  1. सतपुड़ा के जंगल
  2. वाणी की दीनता
  3. टूटने का दु:ख
  4. सन्नाटा
  5. कमल के फूल
  6. असाधारण
  7. स्नेहपथ
  8. गीत फरोश
  • गीत फरोश रचना की चर्चित पंक्ति इस प्रकार है :

“जी हाँ हुजूर मैं गीत बेचता हूँ।
मैं तरह-तरह के गीत बेचता हूँ।।”

चर्चित पंक्ति :

“जिस तरह हम बोलते हैं, उस तरह तू लिख
और उसके बाद भी, हमसे बड़ा तू दिख।।”


Dharamvir Bharati | धर्मवीर भारती

धर्मवीर भारती जी को प्रेम और रोमांस का रचनाकार माना जाता है। इनका जन्म 25 दिसंबर, 1926 को इलाहाबाद उत्तर प्रदेश में हुआ।इनकी कविताओं, कहानियों और उपन्यासों में मध्यमवर्गीय जीवन का यथार्थ चित्रण मिलता है।

रचनाएँ :

सं.रचनाएँवर्ष
1.ठण्डा लोहा1952
2.अंधा युग 1954
3.सात गीत वर्ष1959
4.कनुप्रिया1959
  • “ठण्डा लोहा” इनका पहला काव्य संग्रह है। इसमें हमें रोमांस की झलक देखने को मिलती है। जो इसप्रकार है :

“क्या हुआ अगर मैंने किसी के होंठ के
पाटल कभी चूमे।
क्या हुआ अगर मैंने किसी के नयन के
बादल कभी चूमे।।”

यहां हमें किशोर भावुकता के दर्शन होते हैं।

  • “अंधा युग” को छोड़कर इनकी सभी रचनाओं में प्राय: सर्वत्र रोमांस दिखता है। अंधा युग में महाभारत के 18वें दिन से लेकर श्रीकृष्ण के देहावसान (प्रभास तीर्थ) तक की कथा मिलती है। इस रचना का मूल उद्देश्य युद्ध की समस्या पर विचार करना है।
  • “सात गीत वर्ष” में प्रद्युम्न गाथा संकलित है। “टूटा पहिया” कविता भी सात गीत वर्ष में संकलित है।
  • “कनुप्रिया” खंडकाव्य इतिहास के विरोध में खड़ा है। यह राधा-कृष्ण के प्रेम पर रचित युद्ध एवं इतिहास की व्यर्थता को दर्शाता है।


Shamser Bahadur Singh | शमशेर बहादुर सिंह

शमशेर बहादुर सिंह प्रगतिवादी विचारधारा के कवि हैं। इनका जन्म 13 जनवरी, 1911 को हुआ। ये हिंदी साहित्य के मांसल ऐन्द्रिय सौंदर्य के कवि माने जाते है। इन्होंने आजीवन प्रगतिवादी विचारधारा के समर्थन में कार्य किया।

शमशेर ने हिंदी भाषा को अछूते रंगों, प्रतीकों, बिम्बों एवं मितकथनों की भंगिमाओ से समृद्ध किया है। इनके प्रेम में गहरी आसक्त्ति एवं छायावादी पवित्र वायवीयता है।

“तुम मुझसे प्रेम करो;
जैसे मछलियाँ लहरों से
करती है।”

शमशेर बहादुर सिंह को कहा जाता है :

  • बात या खबर के कवि
  • काव्य बिम्बों का तरल पठार
  • सघन ऐन्द्रिकता के कवि
  • हिंदी उर्दू का दोआब और
  • प्रेम, प्रकृति व सौंदर्य के कवि

अज्ञेय ने शमशेर को “कवियों का कवि” कहा है।

काव्य संग्रह :

  1. सुकून की तलाश में
  2. कुछ कविताएँ
  3. कुछ और कविताएँ
  4. चुका भी नहीं हूँ मैं
  5. इतने अपने पास
  6. बात बोलेगी
  7. काल तुझसे होड़ है मेरी
  8. टूटी हुई बिखरी हुई
  9. कहीं बहुत दूर से सुन रहा हूँ
  • शमशेर को “चुका भी नहीं हूँ मैं” के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है।
  • “काल तुझसे होड़ है मेरी” काव्य संग्रह में “उषा” कविता शामिल है।

चर्चित कविताएँ :

  1. एक पीली शाम
  2. अमन राग
  3. सलोना जिस्म आओ न
  4. वाम वाम वाम दिशा
  5. उदिता (1980)
  6. अभिव्यक्ति का संघर्ष
  • शमशेर का आत्म संघर्ष निजी है।

“मेरी कविताओं को
अगर वो उठा सके
और एक घूंट
पी सके अगर।”

  • शमशेर की कविता अर्थ के ठोस रूप से पलायन करती है तथा प्रयोगवाद एवं प्रगतिवाद का रासायनिक मिश्रण है।

Raghuvir Sahay | रघुवीर सहाय

रघुवीर सहाय हिंदी साहित्य के प्रमुख साहित्यकार एवं पत्रकार थे। इनका जन्म 9 दिसंबर, 1929 को लखनऊ में हुआ।

काव्य संग्रह :

सं.काव्य संग्रहवर्ष
1.सीढ़ियों पर धूप में1960
2.आत्महत्या के विरुद्ध1967
3.हँसो हँसो जल्दी हँसो1975
4.लोग भूल गये हैं1982
5.कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ1989
  • “सीढ़ियों पर धूप में” रघुवीर सहाय का प्रथम संग्रह है। इसमें अनाहत जिजीविषा, लोकतंत्र की विडम्बनाएँ एवं मध्यमवर्गीय जीवन के दबाव की रचनाएं संकलित है।
  • “आत्महत्या के विरुद्ध” काव्य संग्रह की चर्चित कविताएं हैं :
    • भीड़ में मैकू और मैं
    • रामदास की हत्या
  • “आत्महत्या के विरुद्ध” काव्य संग्रह में मंत्री मुसद्दीलाल छाए हुए हैं, जो लोकतंत्र के भ्रष्टाचार से संबंधित है। कवि इसी संग्रह से ख्यात हो गए। यहां साहित्य की हत्या करने वाले बीटनिको एवं अकवितावादियों के विरुद्ध अभिव्यक्ति है।
  • इस संग्रह की चर्चित पंक्तियाँ :

“कितना अच्छा था छायावादी
एक दु:ख लेकर एक गान देता था
कितना कुशल था प्रगतिवादी
हर दु:ख का कारण पहचान लेता था
कितना अकेला हूं मैं समाज में
जहां सदा मरता है एक और मतदाता।”

  • “हँसो हँसो जल्दी हँसो” संग्रह में आपातकाल से संबंधित कविताएं संकलित है।
  • “लोग भूल गये हैं” संग्रह में व्यंग्य और विडम्बना का स्वर गहरा है।
  • “कुछ पते कुछ चिट्ठियाँ” संग्रह में रघुवीर सहाय का काव्य दायरा व्यापक हो गया है। यहां नए रागात्मक मानवीय मूल्यों की तलाश है।

“हाँ रामजान ? वहीँ हम पढ़ते हैं – मरघट वहीं पर है।
किसी अन्य ने बतलाया – मरघट ? मरघट ?
मैं वहीँ जा रहा हूँ, चलिए।”

  • यह आज की सभ्यता, संस्कृति व जनतंत्र पर अत्यंत सार्थक व्यंग्य है।

नामवर सिंह ने इनकी भाषा के बारे में लिखा है, —

“इसमें आवेश में हांफते हुए स्वर की धारा है।
इसलिए एक वाक्य जैसे दूसरे वाक्य के अंदर घुसा हुआ
तीसरे वाक्य को आगे धक्का-सा देता प्रतीत होता है।”

चर्चित पंक्तियाँ :

“भारत हर संकट में एक गाय है
ठीक समय पर ठीक बहस
कर नहीं सकती
राजनीति
फिर जहाँ से शुरू करो
बीच सड़क पर
गोबर कर देता है
विचार।।”



Naresh Mehta | नरेश मेहता

नरेश मेहता ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित यशस्वी कवि हैं। इनका जन्म 15 फरवरी, 1922 को शाजापुर, मध्यप्रदेश में हुआ। इन्होंने अपनी काव्य रचना में सीधे और सरल बिम्बों का प्रयोग किया है।

रचनाएँ :

सं.कृतियाँवर्ष
1.मेरा समर्पित एकान्त1953
2.वन पाखी सुनो1962
3.बोलने दो चीड़ को1962
4.चैत्या
5.संशय की एक रात1962
अरण्या
6.महाप्रस्थान1975
7.शबरी1977
8.प्रवाद पर्व1977
  • “मेरा समर्पित एकान्त” काव्य संग्रह में “समय देवता” कविता संकलित है। इस कविता में धरती के विभिन्न भागों की सांस्कृतिक-राजनीतिक स्थितियों का परिदृश्य प्रस्तुत किया गया है।
  • “संशय की एक रात” एक लम्बी कविता है तथा प्रबन्धात्मक है।

“अब मैं निर्णय हूँ
सबका
अपना नहीं।”

  • नरेश मेहता को “अरण्या” पर साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला है।
  • “महाप्रस्थान” में पांडवों के हिमालय में गलने की कथा है।
  • “शबरी” रचना रामकथा से संबंधित है
  • “प्रवाद पर्व” रचना सीता बनवास पर आधारित है।

Harinarayan Vyas | हरिनारायण व्यास

हरिनारायण व्यास एक हिंदी साहित्यकार के रूप में प्रसिद्ध थे। इनका जन्म 14 अक्टूबर, 1923 को पुणे में हुआ। इन्हें अज्ञेय ने दूसरा सप्तक में स्थान दिया। इन्हें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा भवभूति सम्मान और महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी का शिखर सम्मान प्राप्त हुआ।

रचनाएँ :

  1. मृग और तृष्णा
  2. त्रिकोण पर सूर्योदय
  3. बरगद के चिकने पत्ते
  4. आउटर पर रुकी ट्रेन
  • दूसरे सप्तक में इनकी 11 कविताएँ प्रकाशित हुई थी।

Shakunt Mathur | शकुन्त माथुर

इनका जन्म 20 मार्च,1922 को दिल्ली में हुआ।

काव्य संग्रह :

  1. दोपहरी
  2. ये हरे वृक्ष
  3. जिंदगी का बोध
  4. केसर रंग रँगे आँगन
  5. लहर नहीं टूटेगी
  6. चांदनी चूनर
  7. डर लगता है

इस प्रकार दोस्तों ! आज आपने जाना कि Dusra Saptak Ke Kavi | दूसरा सप्तक के कवि कौन है ? तथा उनकी रचनाओं का संकलन कौनसा है ? साथ ही हमने प्रयोगवाद और नयी कविता के मध्य अंतर भी स्पष्ट किया। उम्मीद है कि आपको आज के नोट्स अवश्य ही पसंद आये होंगे।

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एक गुजारिश :

दोस्तों ! आशा करते है कि आपको Dusra Saptak Ke Kavi | दूसरा सप्तक के कवि एवं रचनाएँ के बारे में हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी I यदि आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके अवश्य बतायें I हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगे I

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