Contents

Russian formalism | रूसी रूपवाद और नयी समीक्षा


Russian formalism | रूसी रूपवाद और नयी समीक्षा : रूपवाद का उद्भव रूस में हुआ। रूस में रूपवादी समीक्षा का सूत्रपात 19 वी सदी के अंतिम चरण में हुआ और बीसवीं सदी के अंतिम वर्षों तक साहित्य समीक्षा को यह आंदोलित करती रही ।

रूपवाद एक कलावादी आंदोलन है किंतु इसके पीछे विज्ञान और तकनीक का परोक्ष प्रभाव है ।

दोस्तों ! हम आपको बता दे कि रुपवाद में भाषा पर सर्वाधिक बल दिया जाता है।

साहित्य में प्रयुक्त भाषा विशिष्ट होती है और वह भाषा का चयनित और उदात्त रूप होता है। रूपवादी भी भाषा पर अधिक जोर देते हैं क्योंकि साहित्य में जो भाषा प्रयुक्त होती है, वह सामान्य नहीं बल्कि एक उदात्त भाषा होती है।

रुपवाद में कवि का दृष्टिकोण यथार्थ के प्रति नहीं होता बल्कि भाषा के प्रति उसका दृष्टिकोण कैसा है, यह महत्वपूर्ण होता है।

साहित्य एक भाषिक संरचना का ही रूप होता है । जो अपने आप में विशेष, स्वायत्त और आत्मानुशासित है। रूसी रूपवाद के सिद्धांतों का अनुवाद फ्रांसीसी भाषा में तोदोरोव ने किया।



Russian formalism| रूसी रूपवाद के प्रवर्तक


रूसी रूपवाद | Russian formalism के प्रवर्तक : रूसी रूपवाद के प्रवर्तक हैं :-

  1. बोरिस एकनेवाम
  2. विक्टर श्फैलोब्सकी
  3. रोमन जैकोब्सन
  4. बोरिस तोमर स्जैब्सकी

रूपवादी समीक्षा के केंद्र :

रूपवादी समीक्षा के केंद्र : रूपवादी समीक्षा के दो केंद्र रहे हैं

  • मास्को
  • पेट्रोगार्ड

मास्को में ” भाषिकी” केंद्र की स्थापना 1915 ईस्वी में हुई। और पेट्रोगार्ड (पीटर्सबर्ग) में इसकी शुरुआत 1916 ईस्वी में हुई।

रोमन जैकोब्सन द्वारा 1921 में “आधुनिक रूसी कविता” शीर्षक पुस्तक प्रकाशित हुई जो भाषायी (रूपवादी) तत्वों को केंद्र में रखकर लिखी गई।

रूपवादियों का मूल मंतव्य कविता की “भाषिक संरचना” या उसकी “टेक्नीक” है। कविता में सर्वाधिक महत्वपूर्ण है :-उसका रूप (भाषा)

कविता में काव्य की भाषा ही सर्वाधिक महत्वपूर्ण है, ना कि कविता में निहित संदेश (मैसेज या थॉट)।

काव्य भाषा में कुछ अद्भुत अजनबीयता को विकसित करके तलाशना रूपवाद का प्रमुख तत्व है।

रूपवादी रूप (शब्द विधान ) को अर्थ से भिन्न करना कठिन मानते हैं। शब्द शक्तियों के प्रसंग में भारतीय आचार्य यह स्वीकार करते हैं कि काव्य में प्रयुक्त शब्दों के अर्थ शब्दकोश के अर्थ से भिन्न अर्थ की ओर संकेत करते हैं।


Russian formalism | रूसी रूपवाद का विश्लेषण


रूसी रूपवाद | Russian formalism का विश्लेषण : “रूपवादी प्रजनात्मक व्याकरण” के अंतर्गत इसका विश्लेषण करते हैं :

रूपवाद है : अपरिचित से परिचित होना।

कविता में दिन-प्रतिदिन की भाषा अपरिचित बनाई जाती है । भाषा का यह नयापन ही कविता का रूप है।
निश्चय ही रूपवाद साहित्य की पारंपरिक और प्रचलित दृष्टि को नकारता है।

दोस्तों ! ये थे रूपवाद के बारे में कुछ महत्वपूर्ण तथ्य, जो परीक्षा की दृष्टि से उपयोगी है । आपको जरूर समझ आ गये होंगे। अब हम एक नए टॉपिक “नयी समीक्षा” पर नज़र डाल लेते है



Nayi Samiksha | नयी समीक्षा


Nayi Samiksha | नयी समीक्षा : इसका विकास बीसवीं सदी के आरंभ में अमेरिका और यूरोप में हुआ।

नयी समीक्षा शब्द का सर्वप्रथम प्रयोग प्रोफेसर स्विनगार्न ने 1910 में किया।

इसके प्रवर्तक हैं : जॉन कोरेसंम। उन्होंने इसे न्यू क्रिटिसिज्म नाम दिया।

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के समर्थक

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के समर्थक : नयी समीक्षा के समर्थक हैं –

  • जॉन कोरेसंम
  • एलनटेट
  • आर.पी.ब्लैकमर
  • रॉबर्ट पेन बालन
  • क्रीमंथ ब्रुक्स
  • विलियम एम्पसन।।

नयी समीक्षा को प्रेरणा और बल प्रदान विलियम एप्सन की पुस्तक “सेवन टाइप्स ऑफ एम्बिगुयिटी” (1930) ने किया।

इनका मत है कि कविता एक समन्वित इकाई है । उसमें रूप पक्ष और वस्तु पक्ष मिलकर एक हो जाते हैं । उन्हें अलग करके नहीं देखा जा सकता ।

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के प्रसिद्ध आलोचक

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के प्रसिद्ध आलोचक : नयी समीक्षा क्षेत्र के प्रसिद्ध आलोचक है –

  • लायोनल ट्रिलिंग
  • डब्लू के विम्सट
  • सर विलियम एप्सन

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य

Nayi Samiksha | नयी समीक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य : नयी समीक्षा के संबंध में महत्वपूर्ण तथ्य निम्नप्रकार से है –

  • नयी समीक्षा में कृतिकार को नहीं, कृति को अधिक महत्व दिया जाता है।
  • इसमें कृति की रूप रचना पर विचार किया जाता है । कृति की शब्दावली ,शब्दों की बनावट, अर्थ का ढांचा ,सादृश्य विधान, भावावेग, आद्यंत गति, अर्थ निर्वाह, सजावट आदि बातों पर विचार किया जाता है।
  • नयी समीक्षा कलाकृति की अखंडता को स्वीकार करती है। नयी समीक्षा में कृति के विचार पक्ष और वस्तु पक्ष को अलग-अलग करके नहीं देखा जा सकता। दोनों की समन्वित इकाई उसे कृति बनाती है ।
  • नयी समीक्षा में कृति के शब्द विधान ,प्रतीक विधान ,लय, शब्द भंगिमा, विरोधाभास, तनाव आदि पर विचार किया जाता है।
  • कविता, शब्द विधान और अर्थ विधान की सम्मिलित बनावट है। इसमें शब्द विधान प्रमुख होता है। वही काव्य को सौंदर्य प्रदान करता है ।
  • नयी समीक्षा रचना को शुद्ध रूप में देखने की पक्षधर है।

यह भी जरूर पढ़े :

एक गुजारिश :

दोस्तों ! आशा करते है कि आपको Russian formalism | रूसी रूपवाद और नयी समीक्षा के बारे में हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी I हमनें परीक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण बिंदुओं के माध्यम से आपको समझाने कि कोशिश की है I

यदि आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके अवश्य बतायें I हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगे I

नोट्स अच्छे लगे हो तो अपने दोस्तों को सोशल मीडिया पर शेयर करना न भूले I नोट्स पढ़ने और हमारी वेबसाइट पर बने रहने के लिए आपका धन्यवाद..!


Leave a Comment

error: Content is protected !!