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Ram Bhakt Kavi Aur Unki Rachnaye | राम भक्त कवि और उनकी रचनाएं


नमस्कार दोस्तों ! कैसे है आप सभी। आशा करते है आप सभी सकुशल होंगे और आगामी परीक्षाओं की तैयारी भी कर रहे होंगे। जैसा की हमने आपसे वादा किया था तो आज हम “Ram Bhakt Kavi Aur Unki Rachnaye | राम भक्त कवि और उनकी रचनाएं” के बारे में विस्तार से चर्चा कर रहे है ताकि आप राम भक्ति काव्य परम्परा के बारे में अच्छे से समझ पाए।

आज हम आपको इसी कड़ी में आगे के नोट्स उपलब्ध करा रहे है जो भरपूर सुसज्जित तथ्यों से भरे है। जो आपके लिए बहुत ही कामगार और उपयोगी साबित होंगे।

रामभक्त कवियों में भी सबसे ज्यादा प्रमुख और प्रसिद्ध कवि तुलसीदास और उनकी रचनाओं का विस्तृत विश्लेषण पर प्रकाश डाल रहे है ताकि आपको सबकुछ अच्छे तरीके से समझ में आ जाये। तो चलिए समझ लेते है —



Ram Bhakt Kavi Aur Unki Rachnaye | राम भक्त कवि और उनकी रचनाएं : दोस्तों ! जहाँ राम भक्त कवियों की बात आती है तो उनमें सबसे पहला नाम अग्रदास का आता है। तो हम अग्रदास से ही शुरू कर रहे है :

अग्रदास | Agradas :

ये अग्रअली के नाम से कविताएं लिखते थे । यह स्वयं को जानकी जी की सखी मानते थे। अग्रदास ने राम भक्ति परंपरा में सर्वप्रथम माधुर्य भावना का या रसिक भावना का समावेश किया।

राम भक्ति परंपरा में रसिक शाखा का प्रवर्तन परशुराम देव व्यास ने किया।

अग्रदास की रचनाएं :

इनकी प्रमुख रचनाएं इस प्रकार से है :

1. ध्यान मंजरी

2. रामध्यान मंजरी

3. अष्टयाम( रामाष्टयाम)

4. हितोपदेश भाषा

5. उपासना बावनी

6. पदावली

  • रामाष्टयाम (अष्टयाम) में श्री राम के ऐश्वर्य रूप की भव्य झांकी मिलती है।
  • अग्रदास के शिष्य नाभादास है। नाभादास ने अपने गुरु के अनुसरण पर अष्टयाम की रचना की।
  • नाभादास की रचना ब्रजभाषा गद्य में है।

रामचरण दास | Ramcharan Das :

इनकी भक्ति स्वसुखी भाव की है । यह स्वयं को राम की पत्नी मानते थे।

  • राम भक्ति परंपरा में घोर श्रृंगारिकता का समावेश करने वाले कवि राम चरण दास है।
  • इस परंपरा में पति-पत्नी भाव की उपासना प्रारंभ करने वाले कवि भी राम चरण दास ही है।

ईश्वरदास | Ishwar Das :

  • इन्होंने 1501 ई. में सत्यवती कथा की रचना की। जिससे विद्वानों का अनुमान है कि यह लगभग 1480 ई. के पास पैदा हुए होंगे।
  • यह ऐसे राम भक्त कवि हैं जो सूफी हैं।

ईश्वरदास की रचनाएं :

  1. भरत मिलाप
  2. अंगद पैज


तुलसीदास | Tulsidas :

हिंदी साहित्य के इतिहास में तुलसीदास बहुत ही महान कवि हुए है। आप सभी जानते ही होंगे कि रामचरितमानस जैसे सर्वश्रेष्ठ लोकप्रिय काव्य के रचयिता तुलसीदास जी ही है। चलिए आज हम तुलसीदास और इनकी रचनाओं के विशेष सन्दर्भ में विस्तार से चर्चा करते है :

जन्म1532 ई.
मृत्यु1623 ई.
बचपन का नामराम बोला
गुरू का नामबाबा नरहर्यादास
शास्त्रीय गुरू का नामशेष सनातन
पत्नी का नामरत्नावली

तुलसीदास के जन्म स्थल के संदर्भ में विवाद है ।

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने सुकर खेत को “राजापुर” गांव माना है, जो उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले में स्थित है।
  • शिव सिंह सेंगर एवं दोनों चरित ग्रंथों में भी राजापुर माना है।
  • हजारी प्रसाद द्विवेदी ने सुकर खेत से तात्पर्य “सोरों “से लिया है जो उत्तर प्रदेश के “एटा “जिले में स्थित है।

तुलसीदास को गढियां और जड़िया कवि कहा जाता है।

  • इनका देहांत संवत 1680 ई. में हुआ जिसका यह पद मिलता है :

“संवत सोलह सो असी, असी गंग के तीर।
श्रावण शुक्ला सप्तमी तुलसी तज्यौ सरीर।।”

  • तुलसीदास कृत “रामचरितमानस” का रचनाकाल भी इसी तरह हम देख सकते हैं :

संवत सोलह सौ इकतीसा।
कथा कहो हरिपद धरि सीसा।।”

सन् 1574 ई. में रामचरितमानस की रचना की गई । तुलसीदास ने रामचरितमानस की रचना 2 वर्ष 7 माह 26 दिन में पूर्ण की।

तुलसीदास की रचनाएं :

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास की 12 प्रमाणिक रचना मानी है जो इस प्रकार है :
01.वैराग्य सन्दीपनी
02.पार्वती मंगल
03.जानकी मंगल
04.रामचरित मानस
05.रामलला नहछु
06.गीतावली
07.कृष्ण गीतावली
08.दोहावली
09.रामाज्ञा प्रश्नावली
10.बरवै रामायण
11.विनय पत्रिका
12.कवितावली
  • हनुमान बाहुक कवितावली का ही परिशिष्ट है । रामचंद्र शुक्ल ने हनुमान बाहुक का उल्लेख स्वतंत्र ग्रंथ के रूप में नहीं किया है।
  • तुलसीदास की मुख्य भाषा अवधी रही है। तुलसीदास ने संस्कृतनिष्ठ अवधी का प्रयोग किया है । लेकिन रामलला नहछु इसका अपवाद है । यह ठेठ अवधी में रचित है।
  • तुलसीदास ने प्रबंध और मुक्तक दोनों रचनाएं लिखी है।

— इनकी प्रबंध रचनाएं इस प्रकार है :

  1. पार्वती मंगल
  2. जानकी मंगल
  3. रामचरितमानस
  4. रामलला नहछु

— इनकी मुक्तक रचनाएं इस प्रकार है :

  1. वैराग्य संदीपनी
  2. गीतावली
  3. कृष्ण गीतावली
  4. दोहावली
  5. रामाज्ञा प्रश्नावली
  6. बरवै रामायण
  7. विनय पत्रिका
  8. हनुमान बाहुक
  9. कवितावली

— तुलसीदास की रचनाएं जो गीतिकाव्य की श्रेणी में आती है इस प्रकार है :

  • गीतावली
  • कृष्ण गीतावली
  • विनय पत्रिका

तुलसीदास की रचनाएं और उनकी शैली :

तुलसीदास की रचनाओं में प्रयुक्त शैली इस प्रकार है :

रचनाएंशैली
रामचरितमानसदोहा चौपाई शैली
गीतावलीकवित सवैया शैली
दोहावलीदोहा शैली
बरवै रामायणबरवै शैली
विनय पत्रिकापद शैली
कवितावली कवित्त शैली

:-

  • काशी के प्रहलाद घाट पर पंडित गंगाराम ज्योतिषि रहा करते थे। गंगाराम के कहने पर तुलसीदास ने मात्र 6 घंटे में “रामाज्ञा प्रश्नावली” की रचना कर दी।
  • रामाज्ञा प्रश्नावली ज्योतिष शास्त्र से सम्बंधित रचना है। इस रचना को “दोहावली रामायण” भी कहा जाता है।
  • बरवै रामायण रहीम के बरवै नायिका भेद से प्रेरित है।
  • वृंदावन में सूरदास से भेंट करने के उपरांत तुलसीदास ने चित्रकूट में कृष्ण गीतावली की रचना की।
  • गीतावली में तुलसीदास ने सूरसागर के भाव पदों का अनुसरण किया है । अंतर केवल राम और श्याम का है ।

तुलसीदास के बड़े ग्रन्थ :

— आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास के पांच ग्रंथ बड़े बताए हैं। इनके पांच ग्रंथ बड़े इस प्रकार है :

  1. रामचरितमानस
  2. गीतावली
  3. दोहावली
  4. विनय पत्रिका
  5. कवितावली

— आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने तुलसीदास के सात ग्रंथ छोटे बताए हैं, जो इस प्रकार है :-

  • वैराग्य संदीपनी
  • पार्वती मंगल
  • जानकी मंगल
  • रामलला नहछु
  • कृष्ण गीतावली
  • रामाज्ञाप्रश्नावली
  • बरवै रामायण


तुलसीदास पर चर्चित वक्तव्य :

तुलसीदास महान कवि है। उनके बारे में विभिन्न विद्वानों ने अलग-अलग वक्तव्य प्रस्तुत किये है जो इस प्रकार है :

भिखारी दास के अनुसार :

“तुलसी गंग दूवो भयो, सुकविन को सरदार”

हरिऔध के अनुसार :

“कविता करके तुलसी न लसै।
कविता पा लसी तुलसी की कला।।”

स्मिथ के अनुसार :

“तुलसीदास मुगल काल के सबसे महान व्यक्ति थे।”

हजारी प्रसाद द्विवेदी के अनुसार :

“लोकनायक वही हो सकता है जो समन्वय का अपार धैर्य रखता है। “

तुलसी का काव्य समन्वय की विराट चेष्टा है। “

ग्रियर्सन के अनुसार :

“बुद्धदेव के पश्चात सबसे बड़े लोकनायक तुलसीदास है। “

ग्रियर्सन ने सर्वप्रथम तुलसीदास को लोकनायक की संज्ञा दी है।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार :

  • इनकी भक्ति सर्वांगपूर्ण है, जो ज्ञान और कर्म को साथ लेकर चली है।

आचार्य शुक्ल ने “सूर सूर तुलसी ससि” के क्रम को उलट दिया है। शुक्ल जी के अनुसार हिंदी काव्य गगन के सूर्य “तुलसीदास” है और चंद्रमा “सूरदास” है ।

  • यह साधनावस्था के कवि है। यह लोकमंगल के कवि हैं।
  • रूपको का जैसा निर्वाह तुलसी ने किया है, किसी अन्य ने नहीं। रामचरितमानस में ज्ञान भक्ति के विवेचन में लंबा सांगरूपक प्रस्तुत किया गया है।

इन्होंने तुलसीदास को अनुप्रासो का बादशाह कहा है।

उदयभान सिंह के अनुसार :

उदयभान सिंह ने तुलसीदास को उत्प्रेक्षाओं का बादशाह कहा है।


बच्चन सिंह के अनुसार :

इन्होंने तुलसीदास को रूपों का बादशाह कहा है।

नाभादास के अनुसार :

नाभादास ने तुलसीदास को कलिकाल का वाल्मीकि कहा है।


तुलसीदास की रचनाओं का विश्लेषण :

1. वैराग्य सन्दीपनी :

  • इसमें कुल 62 छंद प्राप्त होते हैं । यह रचना शांत रस प्रधान है, विनय पत्रिका की भांति।

2. पार्वती मंगल :

  • इसमें 164 छंद मिलते हैं । पार्वती मंगल का आधार कुमार संभव है। (इसमें 16 छंद हरिगीतिका के और 148 छंद अरुण या मंगल के मिलते हैं।)

3. जानकी मंगल :

  • इस रचना में 216 छंद है । इसमें 24 छंद हरिगीतिका के 192 छंद अरुण या मंगल के मिलते हैं।

4. रामचरितमानस :

  • तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस में 7 कांड है। जो इस प्रकार है :
  1. बालकाण्ड
  2. अयोध्याकाण्ड
  3. अरण्यकाण्ड
  4. किष्किंधाकाण्ड
  5. सुंदरकाण्ड
  6. लंकाकाण्ड
  7. उत्तरकाण्ड

इन सात कांडों में चर्चित प्रमुख घटनाएं इस प्रकार है :

बालकाण्ड :

  • शिवजी का धनुष भंग प्रसंग
  • श्री राम का विवाह
  • शिव जी द्वारा सती महिमा प्रसंग
  • राम लक्ष्मण परशुराम संवाद

अयोध्याकाण्ड :

  • राम का राज्याभिषेक वर्णन
  • कैकई वरदान प्रसंग
  • केवट प्रसंग
  • चित्रकूट सभा प्रसंग

रामचंद्र शुक्ल ने चित्रकूट सभा प्रसंग को “परम आध्यात्मिक घटना” की संज्ञा दी है।

अरण्यकाण्ड :

  • शुर्पनखा प्रसंग
  • सीता अपहरण प्रसंग

किष्किंधाकाण्ड :

  • बाली वध
  • हनुमान, सुग्रीव, श्री राम मिलन
  • सुग्रीव का राज्यारोहन
  • हनुमान जी द्वारा माता सीता की खोज में निकलना
  • जामवंत- हनुमान जागरण बोध

सुंदरकाण्ड :

  • सीता-त्रिजटा संवाद
  • सीता वाटिका-मुद्रिका प्रसंग

लंकाकाण्ड :

  • लक्ष्मण-मूर्छा प्रसंग

उत्तरकाण्ड :

  • कलयुग का वर्णन
  • रामराज्य की संकल्पना का वर्णन

रामचरितमानस को उत्तरभारत की बाइबिल कहा जाता है।

  • आचार्य रामचंद्र शुक्ल के अनुसार राम भक्ति काव्य की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें सभी प्रकार की रचनाएं हुई है ।
  • रामचरितमानस की अंतिम उपमा इस प्रकार है :

“कामहि पियारी जिमी नारी”

  • रामचरितमानस अयोध्या से ही लिखना प्रारंभ हुआ और अयोध्या में ही पूर्ण हुआ । लेकिन इसका किष्किंधाकाण्ड काशी में लिखा गया।
  • मूल गोसाईं चरित के अनुसार रामचरितमानस लिखने के बाद तुलसीदास ने सर्वप्रथम यह रसखान को सुनाई थी।
  • कर्पूरचंद खत्री ने गुरुमुखी लिपि और ब्रज भाषा में रामायण लिखी है।


रामचरितमानस की चर्चित पंक्तियां :

“कीरति भनिति भूति भल सोई।
सुरसुरी सम सब मंह हित होई।।”

“गिरा अर्थ विचि सम कहियत भिन्न- न -भिन्न।”

“गोरख जगायो जोग, भगति भगायो लोग।”

5. रामलला नहछु :

  • इसमें मात्र 20 छंद प्राप्त होते हैं । फिर भी यह रचना प्रबंध श्रेणी में आती है। यह सोहर हंसगति छंद में है।
  • मूल गोसाईं चरित के अनुसार तुलसीदास ने इसकी रचना मिथिला यात्रा के दौरान की थी। इसकी भाषा ठेठ अवधी है।

6. गीतावली :

  • इसमें 328 पद है। मूल गोसाईं चरित के अनुसार यह तुलसीदास की पहली रचना है।

7. दोहावली :

  • दोहावली में 873 दोहे हैं। इसका एक 254 वां दोहा है :

“साखी सबद दोहरा कहि कहनी उपखान ।
भगत निरूपही भगति कलि निंदहिं वेद पुराण।।”

8. रामाज्ञा प्रश्नावली :

  • इसमें 7 कांड नहीं, बल्कि 7 सर्ग मिलते हैं। इसमें 343 छंद मिलते हैं। यह ज्योतिष से संबंधित है। इसका नाम दोहावली रामायण भी मिलता है। तुलसीदास की रचनाएं जो 7 कांडों में मिलती है :
  1. रामचरितमानस
  2. गीतावली
  3. बरवै रामायण
  4. कवितावली

9. बरवै रामायण :

  • बरवै रामायण में 69 छंद मिलते हैं।

10. विनय पत्रिका :

  • इसमें 279 पद है। यह विशिष्टाद्वैतवाद से सर्वाधिक प्रभावित रचना है । इस रचना में तुलसीदास के व्यक्तिगत जीवन पर सर्वाधिक प्रकाश पड़ता है।
  • उल्लेख मिलता है कि कलिकाल के साक्षात धमकाने पर तुलसीदास ने कलिकाल के भय से मुक्ति पाने के लिए विनय पत्रिका की रचना की।
  • विनय पत्रिका श्री राम के दरबार में चिट्ठी, पत्री या अर्ज़ी के रूप में लिखी गई है।
  • विनय पत्रिका विशुद्ध शांत रस में रचित है। इसमें लिखा मिलता है :

“जाके प्रिय न राम वैदेही
सो छांड़िये कोटि बैरी सम, जदपि परम सनेही।

11. कवितावली :

  • इसमें 325 छंद है। इसको कवित्त रामायण भी कहते हैं । तुलसीदास मूलत: आदर्शवादी कवि है, लेकिन तीन स्थानों पर वे यथार्थवादी कवि ज्यादा अधिक नजर आते हैं।
  1. विनय पत्रिका
  2. रामचरितमानस के उत्तरकांड में
  3. कवितावली के उत्तरकांड में।
  • कवितावली के उत्तरकांड में युगीन समाज और संस्कृति की गहरी आलोचना मिलती है।

12. हनुमान बाहुक :

  • इस रचना में 44 छंद है। इसमें हनुमान जी की वंदना छप्पय छंद में हुई है। कवितावली के अंत में हनुमान जी की प्रार्थना की गई है।
  • बाहुओं की पीड़ा से मुक्ति पाने के लिए तुलसीदास ने हनुमान बाहुक की रचना की।

Ram Bhakt Kavi Aur Unki Rachnaye | अन्य राम भक्त कवि और उनकी रचनाएं


राम भक्ति शाखा के कुछ अन्य कवि और उनकी प्रमुख रचनाएं इस प्रकार है :

  • राम भक्ति से संबंधित नंददास ने भी प्रारंभ में तीन -चार पद लिखे थे।
  • सूरसागर के पहले और नवें स्कंध में 158 पदों में रामकथा मिलती है।
  • परशुरामदेव व्यास ने ‘रघुनाथ चरित’ और ‘दशावतार चरित’ की रचना की है।
  • सखी संप्रदाय के प्रवर्तक स्वामी हरिदास के पिता माधव दास जगन्नाथी ने “रघुनाथ लीला” की रचना की।
  • रीतिकाल में केशवदास और सेनापति प्रसिद्ध राम भक्त कवि थे। इन्होंने राम भक्ति से संबंधित “रामचंद्रिका “और “कवित्त रत्नाकर” की रचना की है ।
राम भक्त कविरचनाएं
कृपानिवासकृपानिवास पदावली
लालदासअवध विलास
हृदयरामहनुमन्नाटक
प्राणचंद चौहान रामायण महानाटक
रायमल पाण्डेयहनुमत चरित्र
नरहरी बारहठ पौरूषेय रामायण
रीवा नरेश महाराज विश्वनाथ सिंहआनंद रघुनंदन
  • आनंद रघुनंदन राम कथा से संबंधित नाटक है। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने इसे “हिंदी का पहला नाटक” माना है।

दोस्तों ! इस प्रकार आप समझ गए होंगे कि हिंदी साहित्य में राम भक्ति काव्य परंपरा का आविर्भाव रहा है। आज हमने रामभक्ति शाखा के बारे में आपको सम्पूर्ण नोट्स उपलब्ध करा दिए है। उम्मीद करते है कि आपको नोट्स अच्छे लगे होंगे और जानकारी भी उपयोगी लगी होगी।


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एक गुजारिश :

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