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Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु और मैला आंचल


नमस्कार दोस्तों ! आज हम आपको Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु के जीवन परिचय तथा उनकी रचनाओं के बारे में बताने जा रहे है। साथ ही उनकी प्रमुख रचना “मैला आंचल” के संक्षिप्त परिचय से भी अवगत करा रहे है।

मैला आंचल रेणुजी द्वारा रचित प्रसिद्ध उपन्यास है। इस उपन्यास से जुड़े कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में भी चर्चा की जा रही है ताकि आपको प्रतियोगी परीक्षाओं में अच्छी मदद मिल सके। तो चलिए दोस्तों ! आज का ज्ञान शुरू करते है : Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु और मैला आंचल


Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु :

इनका जन्म 4 मार्च 1921 को बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिंगना गांव में हुआ था और इनकी मृत्यु 11 अप्रैल 1977 ईस्वी में हुई। रेणु जी के पिता शिलानाथ मंडल एक किसान थे और भारत के स्वतंत्रता संग्राम में शामिल थे।

रेणु जी के बचपन का नाम फणीश्वरनाथ मंडल था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा फारबिसगंज के अररिया स्कूल से हुई। पंडित रामदेनी तिवारी इनके स्कूल के अध्यापक थे, जिनका उन पर गहरा प्रभाव पड़ा।

उन्होंने मैट्रिक की परीक्षा विराट नगर आदर्श विद्यालय से पास की। काशी से इंटर करने के बाद सन 1942 में वह भी स्वतंत्रता संग्राम में शामिल हो गए। कुछ समय के लिए उन्हें जेल भी जाना पड़ा, वे जहां टीवी की बीमारी से ग्रस्त हो गए थे।

रेणुजी ने 1950 ई में नेपाल क्रांतिकारी आंदोलन में भी भाग लिया। इन्होंने अपने जीवन में तीन विवाह किए थे। पहली पत्नी का नाम रेखा, दूसरी का पदमा और तीसरी का नाम लतिका था।

दूसरी पत्नी पदमा से उनको चार संतान थी। उन्होंने छोटी बेटी का नाम वहीदा रहमान रखा तथा दो पोतियां थी, जिनका नाम शबाना और जरीना रखा।



साहित्यिक जीवन :

इनकी पहली कहानी जो साप्ताहिक विश्वमित्र में 27 अगस्त 1944 को प्रकाशित हुई, वह “वटबाबा” थी। “भित्ति चित्र की मयूरी” इनकी अंतिम कहानी मानी जाती है।

रेणु जी ने आंचलिक कथा की नींव रखी थी। उनके उपन्यास “मैला आंचल” (1954) ने इन्हें हिंदी के बड़े कथाकार के रूप में प्रसिद्ध कर दिया। इसी उपन्यास के लिए इनको पद्मश्री पुरस्कार मिला।

इनकी एक कहानी “मारे गए गुलफाम” पर “तीसरी कसम” फिल्म भी बनी। जिसे हिंदी सिनेमा में “मील का पत्थर” का जाता है। और इसे 1966 में राष्ट्रपति से स्वर्ण पदक मिला।

अज्ञेय इनके परम मित्र थे। हिंदी के अलावा बंगाली और नेपाली भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ थी। उनकी कई रचनाओं में कटिहार रेल्वे स्टेशन का उल्लेख मिलता है।

रेणु जी को आजादी के बाद का प्रेमचंद की संज्ञा दी जाती है। इनकी रचनाओं में एक आम आदमी की कसक है। इनकी रचनाओं में जीवन के गीतों का बड़ा ही सृजनात्मक रूप देखने के लिए मिलता है।

प्रेमचंद के बाद माटी की खुशबू का लेखन रेणुजी ने ही किया। इन्होंने 1972 में विधानसभा का चुनाव भी लड़ा, लेकिन उसमें हार गए।


Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख रचनाएं


Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख रचनाएं इस प्रकार है :

सं.उपन्यास
1.मैला आंचल
2.परती परिकथा
3.दीर्घतपा
4.जुलूस
5.कितने चौराहे
6.पलटू बाबू रोड
सं.प्रसिद्ध कहानियां
1.पार्टी का भूत
2.मारे गए गुलफाम (तीसरी कसम)
3.एक आदिम रात्रि की महक
4.लाल पान की बेगम
5.पंचलाइट
6.तबे एकला चलो रे
7.ठेस
8.संवदिया
9.रस प्रिया
सं.कथा संग्रह
1.एक आदिम रात्रि की महक
2.ठुमरी
3.अग्नि खोर
4.अच्छे आदमी
सं.संस्मरण /रिपोतार्ज
1.ऋण जल- धन जल
2.नेपाली क्रांति कथा
3.वन तुलसी की गंध
4.श्रुत -अश्रुत पूर्वे

Maila Aanchal | मैला आंचल से कुछ महत्वपूर्ण तथ्य


Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख रचना मैला आँचल से कुछ महत्वपूर्ण तथ्यों से आपको अवगत कराने जा रहे है। जिन्हें हम निम्न बिंदुओं के माध्यम से समझने की कोशिश करते है :

  • मैला आंचल रेणु जी का एक सशक्त आंचलिक उपन्यास है। इस उपन्यास की कथावस्तु बिहार राज्य के पूर्णिया जिले के मेरीगंज गांव के जीवन से संबंधित है।
  • यह उपन्यास मात्र एक उपन्यास नहीं वरन उस समय का यथार्थ है, जो लेखक ने देखा और भोगा है। इसकी भूमिका में रेणु जी ने कहा है :

” इसमें फूल भी है, शूल भी है, धूल भी है, गुलाब भी है और कीचड़ भी है,
मैं किसी से दामन बचाकर निकल नहीं पाया”

  • इसमें गरीबी, रोग, भुखमरी, जहालत, धर्म की आड़ में हो रहे व्यभिचार, शोषण, आडंबरो, अंधविश्वासों आदि का चित्रण है। शिल्प की दृष्टि से इसमें फिल्म की तरह घटनाएं एक के बाद एक घटित होती है और उसी में विलीन हो जाती है।
  • उपन्यास की भाषा पर मिथिला का प्रभाव दिखता है। इसकी एक खासियत इसके लोकगीत है, जिससे यह उपन्यास अमर हो गया है।

“अरे मास आषाढ हे ! गरजे घन
बिजुरी ई चमके सखि हे ए ए !
मोहे तजी कांता जाये पर देस आ आ
कि उंमडू कमला माई हे !”



  • लोकगीत व लोक संगीत के माध्यम से उपन्यासकार ने इस उपन्यास की भाषा की सृजनशीलता प्रकट की है। उपन्यास में अनगिनत ऐसे शब्द है, जिनका प्रयोग वहां के अनुरूप किया गया है। जैसे :
उपासउपवास
फिरारी फरार
जोतखी जीज्योतिषी जी
भासनभाषण
टरेनीट्रेनिंग
  • फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख रचना मैला आँचल उपन्यास का अंत सुखांत है।

Maila Aanchal | मैला आंचल उपन्यास का संक्षिप्त परिचय


दोस्तों ! फणीश्वरनाथ रेणु की प्रमुख रचना मैला आँचल एक उपन्यास है। आज इसके संक्षिप्त परिचय पर प्रकाश डाल रहे है। ये एक महत्वपूर्ण रचना है, जिसे समझना आपके लिए जरूरी है। सबसे पहले इसके पात्रों पर एक नज़र डालते है :

उपन्यास के मुख्य पात्र :

डॉ. प्रशांतकमलीबालदेवविश्वनाथ प्रसाद
चुन्नी गोसाईबाबनदाससेवादासलक्ष्मी
रमादासरामप्रियाकालीचरणमंगला आदि

उपन्यास का घटनाक्रम :

यह उपन्यास मेरीगंज नाम के गांव का घटनाक्रम है। उपन्यास का प्रारंभ एक अंग्रेज ऑफिसर मार्टिन और उसकी पत्नी मेरी के गांव में आने से होता है। मार्टिन की पत्नी मेरी के नाम पर ही गांव का नाम मेरीगंज पड़ा।

मेरी, मार्टिन के साथ उसकी बनवाई कोठी में 1 सप्ताह ही रह पाती है, क्योंकि मलेरिया के कारण उसकी मृत्यु हो जाती है। मार्टिन को बहुत दुःख होता है कि गांव में कोई अस्पताल नहीं है। उसकी बहुत भागदौड़ के बाद भी गांव में कोई अस्पताल नहीं बन पाता।



पहली कहानी :

बात बहुत पुरानी हो जाती है, लेकिन यहीं से कहानी जुड़ती है। डॉ. प्रशांत जो एक अनाथ बच्चा था। उसका एक अनाथ आश्रम में एक स्त्री द्वारा पालन पोषण होता है, जो एक अच्छी मां सिद्ध होती है। उसने प्रशांत को पढ़ाया और डॉक्टर बनाया।

वह यहां कई तरह के अंधविश्वासों का सामना करता है। वह हैजा, मलेरिया जैसी बीमारियों को खत्म करना चाहता है। वहां कमली नाम की एक लड़की के साथ डॉक्टर प्रशांत का प्रेम प्रसंग भी चलता है।

अब प्रशांत किसी गांव में रहकर देश की सेवा करना चाहता था। इसलिए कहीं बाहर जाने के लिए मिलने वाली स्कॉलरशिप लेने से इंकार कर देता है और मेरीगंज गांव में नए अस्पताल में उसको भेज दिया जाता है।

अस्पताल को चलाने और अंधविश्वास को दूर करने तीन लोग उसकी सहायता करते हैं :

  1. बालदेव
  2. चुन्नी गोसाई
  3. बाबन दास

दूसरी कहानी :

बालदेव के साथ मठ की कहानी जुड़ जाती है। बालदेव मठ की सेवा करने वाली लक्ष्मी की सहायता करता है। लक्ष्मी और बालदेव एक-दूसरे को पसंद करते हैं, किंतु उनका प्रेम, पवित्र प्रेम की कसौटी पर खरा उतरता है।

तीसरी कहानी :

उपन्यास में तीसरी कहानी जुड़ जाती है : आजादी के आस-पास गांधीजी के प्रभाव की। गांधीजी के प्रभाव का असर यह था कि वहां एक चरखा सेंटर खुला और बहुत से लोग उस चरखा सेंटर से जुड़ गए। उन्होनें खादी पहनने के लिए लोगों को प्रेरित किया। इस घटनाक्रम के साथ ही देश आजाद हो गया।

अंत में कथा डॉ. प्रशांत और कमली की शादी से जुड़कर खत्म हो जाती है। डॉ प्रशांत ने गांव में सभी धर्म जाति के व्यक्तियों को समानता के साथ देश की आजादी और गांव से जोडे रखने का प्रयास किया। कथा का अंत इस आशय संकेत के साथ हुआ कि सोई हुई चेतना तेजी से जाग रही है।


इसप्रकार दोस्तों ! आज आपने Phanishwar Nath Renu | फणीश्वरनाथ रेणु और मैला आंचल से जुड़े बहुत से महत्वपूर्ण तथ्यों के बारे में जाना। उम्मीद करते है कि आपको समझ में आये होंगे और उपयोगी भी लगे होंगे।

इन सभी नोट्स को बार-बार दोहराते हुए अच्छे से याद कर लीजिये। क्योंकि हम हर बार परीक्षा की दृष्टि से ही आपको सटीक और सुसज्जित तथ्यात्मक नोट्स उपलब्ध कराते रहे है। यकीन मानिये ये नोट्स प्रतियोगी परीक्षाओं में आपकी बहुत मदद करेंगे।


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