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Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ


नमस्कार दोस्तों ! आज हम रीतिकाल के “Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ” के बारे में चर्चा करने जा रहे है। आज के नोट्स में रीतिबद्ध काव्य धारा के 5 प्रसिद्ध कवि और उनकी रचनाओं के बारे में अध्ययन करने जा रहे है। तो चलिए आज का टॉपिक शुरू करते है :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : रीतिकाल के रीतिबद्ध कवियों ने शास्त्रीय ढंग पर लक्षण व उदाहरण आदि प्रस्तुत करके अपने ग्रंथों की रचना की। हिंदी के प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाओं का अध्ययन हम निम्नानुसार करेंगे :




चिंतामणि त्रिपाठी | Chintamani Tripathi

इनका जन्म कानपुर के तिकवापुर गांव में 1600 ई. में हुआ। चिंतामणि त्रिपाठी नागपुर के भौंसले राजा मकरंद शाह के दरबार में रहते थे।

प्रमुख रचनाएँ :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नानुसार है :

  1. रसविलास -1633 ई. : यह रीतिकाल की प्रथम रचना मानी जाती है
  2. काव्य विवेक
  3. काव्य प्रकाश
  4. कवि कुल कल्पतरु : यह सर्वांग निरूपक ग्रंथ है
  5. श्रृंगार मंजरी
  6. छंद विचार / पिंगल
  7. रामायण

चिंतामणि त्रिपाठी हिंदी के पहले रसवादी और ध्वनिवादी आचार्य माने जाते हैं। मिश्र बंधुओं ने पूर्व अलंकृत काल में चिंतामणि त्रिपाठी को और उत्तर अलंकृत काल में भिखारी दास को सबसे बड़ा अचार्य माना है।


केशवदास | Keshavdas

केशव दास का जन्म 1555 ई. में हुआ था। ये ओरछा नरेश इंद्रजीत सिंह के दरबारी कवि रहे हैं। इनके पिता का नाम काशीनाथ था और दादा श्रीकृष्णदास थे। आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने केशवदास की गणना भक्ति काल के फुटकर कवियों में की है।

प्रमुख रचनाएँ :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नानुसार है :

  1. रामचंद्रिका – महाकाव्य / प्रबंध रचना
  2. वीरसिंह देव चरित
  3. विज्ञान गीता
  4. जहांगीर जस चंद्रिका
  5. नख-शिख
  6. रसिकप्रिया -1591
  7. कविप्रिया -1601
  8. छन्द माला

प्रमुख रचनाओं का विश्लेषण :

  • केशव दास द्वारा रचित पहला काव्य ग्रंथ रसिकप्रिया है।
  • रतन बावनी केशवदास की पहली रचना मानी जाती है।
  • कविप्रिया अलंकार ग्रंथ है तथा विज्ञान गीता अध्यात्म पर लिखा गया ग्रंथ है।
  • रामचंद्रिका राम भक्ति पर लिखा गया ग्रंथ है।
  • वीरसिंह देव चरित और जहांगीर जस चंद्रिका वीर रस की प्रशस्तियां हैं।
  • कविप्रिया महाराज इंद्रजीत सिंह की दरबारी गणिका रायप्रवीण को शिक्षा देने के लिए लिखा गया।

केशवदास की चर्चित पंक्तियाँ :

“समुझै बाला बालकन बरनन पंथ अगाध।
कविप्रिया केशव करि छमि यह कवि अपराध।।”

“भाषा बोलहिं न जानहि जिनके कुल के दास।
तिन भाषा कविता करि जड़मति केशवदास।।”

केशवदास के बारे में प्रमुख कथ्य :

  • तुलसीदास ने केशवदास को भाषा कवि/ प्राकृत कवि कहा है।
  • विजय पाल सिंह ने केशवदास को कोट का कवि कहा है ।
  • रामचंद्र शुक्ल ने केशवदास को —
    • उक्तिवैचित्र्य का कवि
    • शब्द क्रीडा का कवि
    • हृदय हीन कवि
    • कठोर या कठिन काव्य का प्रेत कहा है।
  • रामस्वरूप चतुर्वेदी ने रामचंद्रिका को छंदों का अजायबघर कहा है। रामचंद्रिका एक रात में लिखी गई रचना है, जिसमें 125 प्रकार के छंद है।

केशवदास के कठिन काव्य के प्रेत बनने के कारण :

  • अलंकार प्रयोग के प्रति दुराग्रह
  • संस्कृत का आगाध पांडित्य
  • चमत्कार प्रदर्शन की भावना
  • केशवदास अपनी संवाद योजना के लिए विख्यात है। स्वयं रामचंद्र शुक्ल ने इन संवादों की भूरी भूरी प्रशंसा की है।
  • केशवदास की संवाद योजना पर इन तीन रचनाओं का प्रभाव दृष्टिगोचर होता है :
    • हनुमन्नाटक (हृदय राम)
    • प्रसन्न राघव (जयदेव )
    • रामायण महानाटक (प्राणचंद चौहान)

केशवदास के संवाद योजना की विशेषता

  • पात्रानुकूलता
  • गत्यात्मकता
  • व्यंजना सौंदर्य
  • दरबारी कूटनीतिज्ञता
  • संक्षिप्तता
  • सरलता
  • भावानुकूलता
  • नाटकीयता
  • मनोभावों की सुंदर व्यंजना

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के चर्चित कथन :

“केशवदास को कवि हृदय नहीं मिला था।
उनमें वह सहृदयता और भावुकता न थी जो एक कवि में होनी चाहिए।”

“इसमें संदेह नहीं कि काव्यरीति का सबसे पहले सम्यक समावेश
केशवदास ने ही कर दिया था।”

“भक्ति काल की वेगवती धारा को रीति के पथ पर मोड देने का ऐतिहासिक कार्य
संपन्न करने वाले विद्वान केशवदास हैं।”

“भक्ति काल और रीतिकाल के बीच सेतु/ युग संधि के कवि और
संक्रमण रेखा पर स्थित कवि केशवदास हैं।”

“यह भक्त और श्रंगारी कवि दोनों है।”



महाकवि भूषण | Maha Kavi Bhushan

इनका जन्म 1613 ई. में कानपुर जिले के तिकवापुर गांव में हुआ था। इनका वास्तविक नाम घनश्याम था। भूषण रीतिबद्ध कविता में आते हैं। इन्होंने अपनी कविता में शिवाजी और छत्रसाल जननायकों की प्रशंसा की है। चित्रकूट के सोलंकी राजा रुद्र के पुत्र हृदयराम ने इन्हें भूषण की उपाधि दी है।

प्रमुख रचनाएँ :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नानुसार है :

  1. शिवा बावनबावनी
  2. शिवराज भूषण
  3. छत्रसाल दशक
  4. अलंकार प्रकाश
  5. छंदोहृदय प्रकाश
  6. दूषण उल्लास
  7. भूषण उल्लास
  8. दूषण हजारा
  • भूषण का एकमात्र प्रमाणिक ग्रंथ शिवराज भूषण है। इसमें 385 पद्य और 105 अलंकार मिलते हैं।

“और राव राजा न ध्यान में लाऊं अब
साह को सराहौ या सराहौ छत्रसाल को ।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के चर्चित कथन :

“भूषण ने वीर प्रशस्ति की रचना की है लेकिन
यह कोरी प्रशस्ति मात्र नहीं है।”

” भूषण की कविता महज चाटुकारिता की कविता नहीं है बल्कि
संपूर्ण राष्ट्र का ह्रदय यहां गूंज रहा है।”

महाकवि भूषण के बारे में प्रमुख कथ्य :

  • रामचंद्र शुक्ल ने भूषण को वीर रस का अप्रतिम कवि कहा है।
  • भूषण की कविता पर कुछ विद्वानों ने धर्मांधता का आरोप लगाया है। जो उचित नहीं है।
  • इनकी कविता में युगबोध की जीवंत अभिव्यक्ति हुई है।

“आपस की फूट हिते सारे हिंदवान टूट्यो
टूट्यो कुल रावण अनीति अति करते।”

  • भूषण की कविता एक बारूद की तरह है जो भक्ति काल को विस्फोट की तरह उड़ा देती है और रीतिकालीन कविता आदिकालीन चारण साहित्य के समीप आ जाती है।
  • इन्हीं अर्थों में भूषण को राष्ट्रीय कवि के रूप में जाना जाता है । यह रीतिकाल में राष्ट्रीय जागरण के कवि माने जाते हैं।
  • इनके सम्मान में स्वयं छत्रसाल ने इनकी पालकी को कंधा दिया था।
  • इनकी कविता अन्याय और अत्याचार की कविता है, प्रतिरोध की कविता है।
  • भूषण की कविता में ओज की मात्रा तो भरपूर है लेकिन भाषा शैली अव्यवस्थित है और कहीं-कहीं तो काव्य विन्यास भी गड़बड़ है।
  • वीर रस के चारों भेद : युद्धवीर, दयावीर, दानवीर, धर्मवीर चारों भूषण की कविता में मिलते हैं।
  • भूषण का प्रिय अलंकार यमक अलंकार है।

“ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहनवारी,
ऊँचे घोर मंदर के अंदर रहाती हैं।
कंद मूल भोग करैं, कंद मूल भोग करैं,
तीन बेर खातीं, ते वै तीनबेर खाती हैं॥”

शिवराज भूषण


पद्माकर | Padmakar

इनका जन्म 1753 ई. में उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में हुआ। पद्माकर रीतिकाल के अंतिम प्रसिद्ध कवि माने जाते हैं। यह त्योहारों की कवि माने जाते हैं। रीति काल में पद्माकर ने त्योहारों का अत्यंत सुंदर चित्रण किया है। विशेषकर फागुन में होली का।

पद्माकर राजसी ठाट-बाट के साथ रहा करते थे। इनको देखकर किसी राजा का ही भ्रम हुआ करता था। ये रीतिकाल के प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं तथा रीतिबद्ध धारा के भी प्रतिनिधि कवि माने जाते हैं।इनकी कविताई में वीरश्रृंगार एवं भक्ति रस की त्रिवेणी प्रवाहित हुई है।

रामस्वरूप चतुर्वेदी लिखते हैं :

“पद्माकर में वीर श्रृगार एवं भक्ति के विविध एवं सच्चे अंग विद्यमान है।”

आचार्य रामचंद्र शुक्ल ने पद्माकर को भाव मूर्ति विधायिनी कल्पना का सृष्टा कहा है। इन्होंने सर्वप्रिय कवि “बिहारी और पद्माकर” को कहा है।

प्रमुख रचनाएँ :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नानुसार है :

  1. जमुना लहरी
  2. गंगा लहरी
  3. राम रसायन
  4. प्रबोध पचासा
  5. पदमाभरण
  6. जगत विनोद
  7. कली पच्चीसी
  8. ईश्वर पच्चीसी
  9. राजनीति
  10. लीलाहारीलीला
  11. हिम्मत बहादुर विरुदावली
  12. प्रताप विरुदावली

प्रमुख रचनाओं का विश्लेषण :

  • गंगा लहरी :

यह अंतिम रचना है। यह कुष्ठ रोग से मुक्ति पाने के लिए लिखी गई है।

  • प्रबोध पचासा :

यह रचना भी रोग ग्रस्त हालत में लिखी गई थी। इस रचना में भक्ति और वैराग्य का सुंदर समन्वय मिलता है।

  • हितोपदेश :

यह रचना ग्वालियर के दौलतराव सिंधिया के दरबार में लिखी गई थी।

  • पदमा भरण :

यह अलंकार ग्रंथ है। यह रचना जयपुर के राजा जगत सिंह के संरक्षण में लिखी गई। इसमें केवल अर्थालंकारों का जिक्र है। जिसका स्रोत चंद्रालोक (जय देव) और कुवलयानंद (अप्पय दिक्षित) है।

  • हिम्मत बहादुर विरुदावली :

अवध के सेनापति गोसाई अनूपगिरी का ही उपनाम हिम्मत बहादुर रहा है। आचार्य शुक्ल ने इसे वीर रस की फड़कती हुई रचना कहा है।

  • जगत विनोद – 1810 :

पद्माकर की ख्याति का आधारभूत ग्रंथ है। इसके आधार पर पद्माकर आचार्य के रूप में प्रसिद्ध हुए।इस रचना में 6 प्रकरण वह 731 छंद है ।
जगतविनोद का मुख्य विषय रस व नायिका भेद का चित्रण रहा है। यह जगत सिंह के आश्रय में लिखी गई है।

  • राम रसायन :

यह रचना वाल्मीकि रामायण के आधार पर दोहा-चौपाई शैली में लिखी गई है।

  • प्रताप विरुदावली

यह रचना प्रताप सिंह के आश्रय में लिखी गई है।

— पद्माकर में मतिराम की सी सह्रदयता, बिहारी की वाग्वैध्यता, देव की भांति मौजीपन देखने को मिलता है। पद्माकर कविराज शिरोमणि की उपाधि से विख्यात है। यह उपाधि प्रताप सिंह/ जगत सिंह द्वारा दी गई।

आचार्य रामचंद्र शुक्ल के कथन :

सारांश यह है कि इनकी भाषा में वह अनेक रुपता है, जो एक बड़े कवि में होनी चाहिए। भाषा की ऐसी एकरूपता गोस्वामी तुलसीदास में ही दिखाई देती है।

“ऐसा सर्वप्रिय कवि इसकाल के भीतर बिहारी और पद्माकर को छोड़कर दूसरा नहीं हुआ।”

जिस प्रकार ये अपनी परंपरा के परमोत्कृष्ट कवि हैं, उसी प्रकार प्रसिद्धि में भी अंतिम हैं।



भिखारीदास | Bhikhari Das

इनका जन्म अवध के व्योंगा गांव में हुआ। इनकी कविताई का काल 1734-1750 ई. है। ये प्रतापगढ़ के राजा पृथ्वी सिंह के भाई हिंदूपति सिंह के दरबार में रहते थे।

प्रमुख रचनाएँ :

Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ : इनकी प्रमुख रचनाएँ निम्नानुसार है :

  1. काव्य निर्णय – 1746 ई. : यह सर्वांगनिरुपक ग्रथं है। संपूर्ण रीतिकाल में साहित्य शास्त्र का यह सर्वश्रेष्ठ ग्रंथ माना जाता है।
  2. रससारांश -1742 ई.
  3. श्रृंगार निर्णय -1750 ई.
  4. छंदोवर्ण पिंगल -1742 ई.

इनकी प्रमुख अनुवादित रचनाएँ इस प्रकार है :

  1. नाम प्रकाश /अमरकोश
  2. विष्णु पुराण

भिखारी दास की पंक्तियां :

“आगे के कवि रीझि है तो सुकविताई।
नाहि तो राधिका कन्हाई सुमिरण को बहानो है।। “

“तुलसी गंग, दुवौ भये, सुकविन के सरदार”

“ब्रजभाषा हेत ब्रजवास ही न अनुमानौ।
ऐसे-ऐसे कविन की बानी हू सौ जानिए।। “

डॉ बच्चन सिंह के अनुसार :

“भिखारी दास हिंदी काव्य शास्त्र के पहले आचार्य हैं,
जिन्होंने हिंदी काव्य परंपरा, भाषा, छंद, तुक आदि पर भी विचार व्यक्त किया है।”

इसप्रकार दोस्तों ! आज आपको Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ के बारे में अच्छे से समझ आया होगा। रीतिबद्ध काव्य धारा के बहुत से कवि है। इन सभी का एक ही पोस्ट में जिक्र करना आसान ना होगा।

इसलिए अन्य शेष प्रमुख रीतिबद्ध कवियों का जिक्र हम आगामी नोट्स “Ritibadh Kavya dhara Ke Kavi | अन्य रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ” में करने वाले है। तो बने रहिये हमारे साथ।


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एक गुजारिश :

दोस्तों ! आशा करते है कि आपको Ritibadh Kavi Aur Rachnaye | प्रमुख रीतिबद्ध कवि और उनकी रचनाएँ के बारे में हमारे द्वारा दी गयी जानकारी पसंद आयी होगी I यदि आपके मन में कोई भी सवाल या सुझाव हो तो नीचे कमेंट करके अवश्य बतायें I हम आपकी सहायता करने की पूरी कोशिश करेंगे I

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